मिल्खी - भाग 2
अंतिम संस्कार हुआ, गांव इकट्ठा हुआ और धीरे धीरे मिल्खी की पत्नी की यादें सिमित रह गयीं केवल उस के परिवार तक। मिल्खी खेत जाता, बच्चों का ख्याल रखता, और अपनी स्वर्गीय पत्नी को याद करता। दादा जी बताते थे की एक दिन जब वो खेत से घर पहुंचा तो उसने देखा की तवा गरम था। उसने दूसरी और नज़र की तो उसे खाना पका हुआ रखा था लेकिन चूल्हे में न लकड़ी थी और न ही राख। ये देख के उसे अचम्भा हुआ की खाना आखिर कैसे तैयार हुआ। पहले उसे लगा की शायद आस पास के किसी परिवार ने उनके लिया खाना छोड़ा हो, क्योंकि उसके बच्चे अभी न ही इतने बड़े थे कि खाना बना सकें न ही उन्होंने पहले कभी बनाया था। उसने आभार प्रकट करना उचित समझा जिसने भी खाना बना के रखा था उनके प्रति। लेकिन उसे ज्ञात ना था कि वो आखिर धन्यवाद करे भी तो किस को। उसने अपने चचेरे भाईओं, भाभिओं आस पास के लोगों से पूछना शुरू किया किन्तु सबने ये मानने से मना कर दिया की उन्होंने भोजन बनाया है। आस पास भटकने के बाद जब वो घर आ कर अपने कमरे में घुसा तो अपनी पत्नी को चारपाई पर देख वो दर गया और उसकी चीख निकल गई। वो इतनी ज़ोर से चिल्लाया था की बाहर खेल र...